चतुर्थ मासानुमासिक कल्प (4th Masanumasik kalp)
चतुर्थ मासानुमासिक कल्प (4th Masanumasik kalp)
मासानुमासिक कल्प – चतुर्थ मास
( सुश्रुत संहिता )
प्रयुक्त सामग्री:– दूर्वा, अनंतमूल, रासना, यष्टिमधु, पद्मा, सिता ।
लाभ:–DNA को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में, गर्भस्त्राव से रक्षा करने में, भ्रूण को पोषण देने में, उत्सर्जन तंत्र एवं तंत्रिका तंत्र के कार्य करने में, शरीर की तुलना में सिर बड़ा करने में, लिवर लाल रक्त कोशिका बनाने आदि में सहायक है।
सेवन विधि:– वैद्यकीय परामर्शानुसार अथवा
10-10 ग्राम सुबह शाम दूध के साथ सेवन करें।
सावधानियां :-
1. चौथे माह में भ्रूण का विकास बहुत ही तेजी से होता है इसलिए मां को पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
2. भोजन में ओमेगा 3 फैटी एसिड को शामिल करें।
3. अपच एव कब्ज से बचने के लिए जक फूड से परहेज करें।
4. हल्का कार्य करते हुए सदा सक्रिय रहे।
मात्रा:– 600ग्राम ।
मूल्य :–600/-
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