तृतीय मासानुमासिक कल्प (3rd Masanumasik kalp)
तृतीय मासानुमासिक कल्प (3rd Masanumasik kalp)
मासानुमासिक कल्प - तृतीय मास
(सुश्रुत संहिता)
प्रयुक्त सामग्री :– वन्दाक, क्षीरविदारी, अनंतमूल, प्रियंगु, नीलकमल, सिता ।
लाभ:– DNA को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में सहायक, गर्भ स्त्राव से रक्षा करने में, भ्रूण को पोषण देने, सभी अंग, तन्त्र एवं इंद्रियों के बनने में सहायक, शिशु के विकास जैसे– हाथ, पैर, चेहरा, हड्डियां, मांसपेशियां, हाथ और पैरों की उंगलियां, त्वचा, नाखून, आदि में सहायक है।
सेवन विधि:– वैद्यकीय परामर्शानुसार अथवा
10 -10 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
सावधानियां :-
1. भीड़ -भाड़, प्रदूषित, एवं रेडिएशन वाली स्थानो पर जाने से बचे।
2.उबड़ - खाबड़ रास्तो पर नहीं चलना।
3. लंबी समय तक खाली पेट नहीं रहना।
4. मिर्च मसाले का सेवन से परहेज करना ।
मात्रा:–600ग्राम ।
मूल्य:– 600/-
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