अष्टम मासानुमासिक कल्प (8th Masanumasik kalp)
अष्टम मासानुमासिक कल्प (8th Masanumasik kalp)
मासानुमासिक कल्प- अष्टम मास
(सुश्रुत संहिता)
प्रयुक्त सामग्री:–कपित्थ, बृहती, पटोल पत्र, इक्षु, व्याघ्री, सिता ।
लाभ:– DNA को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में, गर्भपात से रक्षा करने में, शिशु को पोषण देने में, शिशु के श्वास लेने में, त्वचा की झुर्रियां कम करने में, शिशु के हलचल करने में, शिशु के आसपास से इम्यूनेटीक फ्लूड कम करने में, शिशु अपना सिर नीचे की ओर कर लेता है जिससे नॉर्मल डिलीवरी आदि में सहायक है।
सेवन विधि:– वैद्यकीय परामर्शानुसार अथवा 10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
सावधानियां :-
1. संतुलित सुपाच्य एवं थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार आहार लें।
2. आराम करें एवं तनाव से बचें।
3. बाई करवट लेकर सोयें।
4. सोने से पूर्व हाथ, पैर, सर और गर्दन की मालिश करें।
5. सोने की जगह साफ सुथरा रखें।
मात्रा:–600ग्राम
मूल्य:– 600/-
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